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Wednesday, 20 May 2026

पाठ क्या लिखूँ ? सरलीकरण (कक्षा ९ )

 

पाठ  - क्या लिखूं ? का सार

 

लेखक पदुमलाल एक निबंधकार हैं

निबंध लिखना उनका शौक है

लिखने के लिए तथ्य इकट्ठे करना , भाषा तैयार करना मतलब परिश्रम करना पड़ता  है|

निबंध के विषय – अमिता और नमिता दो बच्चियां हैं जिन्होंने स्कूल के लिए लेखक को दो अलग – अलग विषय लिखने को दिए

१ – समाज सुधार – जिस पर लिखने को बहुत है | क्या लिखे क्या छोड़े समझ नहीं पा  रहा   |

हर युग में दोष उत्पन्न होते रहते है इसलिए उन्हें सुधारने का कार्य भी चलता रहता है , यह हमेशा अपना रूप बदलता रहता है

समाज सुधारक – बुद्धदेव , महावीर स्वामी , नागार्जुन ,शंकराचार्य ,कबीर , नानक , राजा राम मोहन राय  , स्वामी दयानंद , और महात्मा गाँधी

– दूर के ढोल सुहावने लगते हैं – जिस पर लिखने को कुछ खास नहीं है | इसके बारे में ज्यादा जानकारी भी कहीं नहीं मिलेगी |यदि पहले पता होता तो सामग्री के लिए खोज भी करता | अब केवल अपने ज्ञान पर ही भरोसा है |

निबंध की विशेषताएं – आदर्शवाद , तथ्य (facts ) , शैली ( writing style ), रूपरेखा ( format ) ,क्रम , भाव , विचार , यथार्थवादी होना चाहिए , भाषा में प्रवाह हो , वाक्य छोटे हों , निबंध छोटा हो

निबंध लिखने का क्रम होना चाहिए – विचार , भाव , तथ्य , शैली , रूपरेखा , सरलता , स्पष्ट , प्रवाह , लघु , वाक्यों में जुड़ाव और आवश्यकता के अनुसार अलंकार एवं मुहावरे तथा अंत में शीर्षक

( कभी – कभी कुछ लेखक अपने आप को महत्त्वपूर्ण दिखाने के लिए अस्पष्ट वाक्य  , कठिन भाषा , दुविधा पूर्ण विचार का प्रयोग करे हैं ताकि सभी को लगे कि आप बहुत गंभीर लेखक हैं जैसे कवियों  के नाम – सेनापति , बाणभट्ट ) अमीर  खुसरो जैसे लेखक एक बार में कई बात कहने की कला जानते थे इसलिए लेखक को लगता है कि मैं भी दोनों विषयों पर एक साथ बात करू तो --

शीर्षक – हैट ( विचार / भाव ) ज़रूरी है खूंटी ( शीर्षक ) नहीं

बाद में भी लिख सकते हैं , मित्रों से भी लिखवा सकते हैं और पाठकों पर भी छोड़ सकते है जैसे शेक्सपीयर के एक नाटक का नाम “ जैसा तुम चाहो “ रखा गया | क्योंकि नाटक लिखना आसान है शीर्षक बनाना मुश्किल |

अंग्रेज़ी लेखक  मानटेन ने कहा –

1.      अनुभव आधारित ही लिखे

इससे निबंध रोचक , प्रवाहपूर्ण , प्रामाणिक , उपयोगी एवं विश्वसनीय बनता है |

लेखक अपने देखे , सुने या अनुभव किये विचारों को ही लिखता है जिससे उसके निबंध यथार्थ और सच्चे होते हैं |

व्यकितगत निबंध भावनात्मक गहराई लिए होते हैं और नवीनता लाते  हैं |

इसके लिए ज्ञान के साथ – साथ सूक्ष्म दृष्टि  ( बारीकी से देखना )

श्रवण शक्ति ( ध्यान से सुनना )

संवेदनशीलता ( भावुकता / जुडाव )लेखक की विशेषता है |

युवा और वृद्ध दोनों ही वर्तमान से असंतुष्ट हैं क्योंकि –

युवा अपने भविष्य में अपनी इच्छाओं के लिए परेशान  हैं | उन्हें जल्दी ही सब कुछ चाहिए | सब्र / धैर्य नहीं है | आगे आने वाली चुनौतियों पर ज्यादा नजर रखते हैं |

वृद्ध अपने अतीत से चिपके रहते हैं , शरीर बिमारियों का घर बन जाता है इसलिए वे चिडचिडे और असंतुष्ट दिखते  हैं | उन्हें लगता है कि अब समाज को उनकी जरुरत नहीं है |ये अन्भावी होते हैं |

अपने अतीत को युवाओं के वर्तमान से अच्छा बताते हैं | इनके अनुसार इनका समय ज्यादा अच्छा था |

जीवन प्रगितशील है आज जो नया है कल पुराना हो जाएगा |

 

 

 

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