पाठ -
क्या लिखूं ? का सार
लेखक पदुमलाल एक निबंधकार हैं
निबंध लिखना उनका शौक है
लिखने के लिए तथ्य इकट्ठे करना , भाषा तैयार करना मतलब
परिश्रम करना पड़ता है|
निबंध के विषय – अमिता और नमिता दो बच्चियां हैं जिन्होंने
स्कूल के लिए लेखक को दो अलग – अलग विषय लिखने को दिए
१ – समाज सुधार – जिस पर लिखने को बहुत
है | क्या लिखे क्या छोड़े समझ नहीं पा
रहा |
हर युग में दोष उत्पन्न होते रहते है इसलिए उन्हें सुधारने
का कार्य भी चलता रहता है , यह हमेशा अपना रूप बदलता रहता है
समाज सुधारक – बुद्धदेव , महावीर स्वामी , नागार्जुन
,शंकराचार्य ,कबीर , नानक , राजा राम मोहन राय
, स्वामी दयानंद , और महात्मा गाँधी
२ – दूर के ढोल सुहावने लगते हैं –
जिस पर लिखने को कुछ खास नहीं है | इसके बारे में ज्यादा जानकारी भी कहीं नहीं
मिलेगी |यदि पहले पता होता तो सामग्री के लिए खोज भी करता | अब केवल अपने ज्ञान पर ही भरोसा है |
निबंध की विशेषताएं – आदर्शवाद , तथ्य (facts ) , शैली ( writing style ), रूपरेखा ( format ) ,क्रम , भाव , विचार , यथार्थवादी होना चाहिए , भाषा में
प्रवाह हो , वाक्य छोटे हों , निबंध छोटा हो
निबंध लिखने का क्रम होना चाहिए – विचार , भाव , तथ्य ,
शैली , रूपरेखा , सरलता , स्पष्ट , प्रवाह , लघु , वाक्यों में जुड़ाव और आवश्यकता
के अनुसार अलंकार एवं मुहावरे तथा अंत में शीर्षक
( कभी – कभी कुछ लेखक अपने आप को महत्त्वपूर्ण
दिखाने के लिए अस्पष्ट वाक्य , कठिन भाषा
, दुविधा पूर्ण विचार का प्रयोग करे हैं ताकि सभी को लगे कि आप बहुत गंभीर लेखक
हैं जैसे कवियों के नाम – सेनापति ,
बाणभट्ट ) अमीर खुसरो जैसे
लेखक एक बार में कई बात कहने की कला जानते थे इसलिए लेखक को लगता है कि मैं भी
दोनों विषयों पर एक साथ बात करू तो --
शीर्षक – हैट ( विचार / भाव ) ज़रूरी है खूंटी ( शीर्षक )
नहीं
बाद में भी लिख सकते हैं , मित्रों से भी लिखवा सकते हैं और
पाठकों पर भी छोड़ सकते है जैसे शेक्सपीयर के एक नाटक का
नाम “ जैसा तुम चाहो “ रखा गया | क्योंकि नाटक लिखना आसान है शीर्षक बनाना
मुश्किल |
अंग्रेज़ी लेखक
मानटेन ने कहा –
1.
अनुभव आधारित ही लिखे
इससे निबंध रोचक , प्रवाहपूर्ण , प्रामाणिक , उपयोगी एवं
विश्वसनीय बनता है |
लेखक अपने देखे , सुने या अनुभव किये विचारों को ही लिखता
है जिससे उसके निबंध यथार्थ और सच्चे होते हैं |
व्यकितगत निबंध भावनात्मक गहराई लिए होते हैं और नवीनता
लाते हैं |
इसके लिए ज्ञान के साथ – साथ सूक्ष्म दृष्टि ( बारीकी से देखना )
श्रवण शक्ति ( ध्यान से सुनना )
संवेदनशीलता ( भावुकता / जुडाव )लेखक की विशेषता है |
युवा और वृद्ध दोनों ही वर्तमान से असंतुष्ट हैं
क्योंकि –
युवा अपने भविष्य में अपनी इच्छाओं के लिए परेशान हैं | उन्हें जल्दी ही सब कुछ चाहिए | सब्र /
धैर्य नहीं है | आगे आने वाली चुनौतियों पर ज्यादा नजर रखते हैं |
वृद्ध अपने अतीत से चिपके रहते हैं , शरीर बिमारियों का घर
बन जाता है इसलिए वे चिडचिडे और असंतुष्ट दिखते
हैं | उन्हें लगता है कि अब समाज को उनकी जरुरत नहीं है |ये अन्भावी होते
हैं |
अपने अतीत को युवाओं के वर्तमान से अच्छा बताते हैं | इनके
अनुसार इनका समय ज्यादा अच्छा था |
जीवन प्रगितशील है आज जो नया है कल पुराना हो जाएगा |
0 comments :
Post a Comment